सेशेल्स के स्वतंत्रता दिवस समारोह की मिलिट्री परेड में भारतीय नौसेना ने लिया हिस्सा


Indian Navy: भारतीय नौसेना (Indian Navy) की सैन्य-टुकड़ी ने सेशेल्स (Seychelles) के स्वतंत्रता दिवस (National Day) समारोह की मिलिट्री परेड (Military Parade) में हिस्सा लिया है. 1976 से लेकर अब तक भारतीय नौसेना लगातार सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस के मौके पर मौजूद रही है. इस साल भारतीय नौसेना का स्वदेशी मिसाइल डेस्ट्रोयर (युद्धपोत) आईएनएस कोलकाता (IANS Kolkata) सेशेल्स में ऑपरेशन्ली तैनात है.

115 द्वीपों के समूह वाला सेशेल्स देश हिंद महासागर में पूर्वी अफ्रीका के तट के करीब बसा है और सामरिक दृष्टि से भारतीय के लिए एक अहम मित्र-राष्ट्र है. हर साल सेशेल्स 29 जून को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है. इस साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 3 जुलाई यानि रविवार को राजधानी पोर्ट-विक्टोरिया में एक भव्य सैन्य परेड का आयोजन किया गया जिसमें सेशेल्स डिफेंस फोर्सेंज के साथ साथ स्थानीय नागरिकों ने भी हिस्सा लिया.

एयरक्राफ्ट के इंजर सेशेल्स सेना को सौंपे

इस परेड में भारतीय नौसेना के आईएनएस कोलकता युद्धपोत पर तैनात नौसैनिकों ने भी मार्च-पास्ट किया. नौसेना के मार्चिंग-बैंड ने भी इस परेड में हिस्सा लिया. मिलिट्री-परेड में हिस्सा लेने से पहले आईएनएस कोलकता स्टेल्थ गाईडेड मिसाइल डेस्ट्रोयर (जंगी जहाज) ने सेशेल्स के डोरनियर एयरक्राफ्ट के साथ एक्सक्लुजिव ईकोनोमिक जोन (ईईजेड) की पैट्रोलिंग की. आईएनएस कोलकता पर सेशेल्स डिफेंस फोर्सेज़ के नौसैनिकों को ऑपरेशन्ल ट्रेनिंग भी दी गई. इस दौरान आईएनएस कोलकता ने भारत ओवरहोलिंग कर लाए गए डोरनियर एयरक्राफ्ट के इंजन भी सेशेल्स की सेना को सौंपे. इसके अलावा सेशेल्स कोस्टगार्ड को उनके जहाज के लिए इंजीनियरिंग स्पेयर-पार्ट्स भी सौंपे.

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आपसी संबंध हुए मजबूत

हाल के वर्षों में भारत (India) और सेशेल्स (Seychelles) के बीच सामरिक संबंध काफी मजबूत हुए हैं. हाल ही में नौसेना प्रमुख (Navy Chief) एडमिरल आर हरि कुमार (R Hari Kumar) ने सेशेल्स की यात्रा की थी. इसके अलावा वर्ष 2018 में पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने सेशेल्स की सैन्य क्षमता मजबूत करने के लिए 100 मिलियन डॉलर की मदद का ऐलान किया था. सेशेल्स के द्वीप पर भारत एक नेवल बेस (Naval Base) भी तैयार कर रहा है जहां एक हवाई पट्टी भी तैयार की जा रही है. ये नेवल बेस इस मायने में भी बेहद अहम है क्योंकि अफ्रीकी देश जिबूती में चीन (China) ने पहले ही अपना एक मिलिट्री-बेस तैयार कर लिया है. 

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